श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.3.3 
तं माता रोरूयमाणमुवाच। किं रोदिषि केनास्यभिहत इति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
माता ने बार-बार रोते हुए अपने पुत्र से पूछा - 'बेटा! तुम क्यों रो रहे हो? तुम्हें किसने मारा है?'॥3॥
 
The mother asked her son who was crying repeatedly - 'Son! Why are you crying? Who has killed you?'॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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