श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.3.25 
तत: कदाचिदुपाध्याय आयोदो धौम्य: शिष्यानपृच्छत् क्व आरुणि: पाञ्चाल्यो गत इति॥ २५॥
 
 
अनुवाद
फिर कुछ समय बाद उपाध्याय आयोदधौम्य ने अपने शिष्यों से पूछा - 'पांचाल निवासी आरुणि कहाँ चले गए?' ॥25॥
 
Then after some time, Upadhyay Ayoddhaumya asked his disciples - 'Where has Aruni, the resident of Panchal, gone?' 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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