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mahabharat 1.3.21: (गुरु की आज्ञा का पालन किस प्रकार करना चाहिए, यह आगे बताया गया है—) इन्हीं दिनों आयोदधौम्य नाम के एक प्रसिद्ध महर्षि हुए। उनके तीन शिष्य थे- उपमन्यु, आरुणि पांचाल और वेद॥21॥   |   mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.3.21 
एतस्मिन्नन्तरे कश्चिदृषिर्धौम्यो नामायोदस्तस्य शिष्यास्त्रयो बभूवुरुपमन्युरारुणिर्वेदश्चेति॥ २१॥
 
 
अनुवाद
(गुरु की आज्ञा का पालन किस प्रकार करना चाहिए, यह आगे बताया गया है—) इन्हीं दिनों आयोदधौम्य नाम के एक प्रसिद्ध महर्षि हुए। उनके तीन शिष्य थे- उपमन्यु, आरुणि पांचाल और वेद॥21॥
 
(How one should obey Guru's orders is told in the future context—) During these days, there was a famous Maharishi named Ayoddhaumya. He had three disciples – Upamanyu, Aruni Panchal and Veda. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)