श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.3.19 
तेनैवमुक्तो जनमेजयस्तं प्रत्युवाच भगवंस्तत् तथा भविष्यतीति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
श्रुतश्रवा के ऐसा कहने पर जनमेजय ने कहा, 'हे प्रभु! सब कुछ उनकी इच्छा के अनुसार ही होगा।'
 
When Shrutashrava said this, Janamejaya replied, 'O Lord! Everything will happen according to his wish.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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