Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.3.172-173: जनमेजय पहले तक्षशिला गए। वहाँ उन्होंने पूर्ण विजय प्राप्त की थी। उत्तंक ने राजा जनमेजय को मंत्रियों से घिरे हुए और महान विजय से धन्य देखकर पहले न्यायपूर्वक उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया। फिर उचित समय पर उन्होंने उनसे उचित वचनों सहित इस प्रकार कहा ॥172-173॥ | mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जनमेजय पहले तक्षशिला गए। वहाँ उन्होंने पूर्ण विजय प्राप्त की थी। उत्तंक ने राजा जनमेजय को मंत्रियों से घिरे हुए और महान विजय से धन्य देखकर पहले न्यायपूर्वक उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया। फिर उचित समय पर उन्होंने उनसे उचित वचनों सहित इस प्रकार कहा ॥172-173॥
Janamejaya first went to Takshila. He had achieved complete victory there. Uttanka, seeing King Janamejaya surrounded by ministers and blessed with great victory, first blessed him with victory in a just manner. Then, at the right time, he spoke to him in the following manner with appropriate words:॥ 172-173॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥