vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना
»
श्लोक 171
श्लोक
1.3.171
स हास्तिनपुरं प्राप्य न चिराद् विप्रसत्तम:।
समागच्छत राजानमुत्तङ्को जनमेजयम्॥ १७१॥
अनुवाद
हस्तिनापुर पहुँचते ही महान ब्राह्मण उत्तंक की भेंट राजा जनमेजय से हुई।
Soon after reaching Hastinapur the great Brahmin Uttank met King Janamejaya.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd