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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना
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श्लोक 168
श्लोक
1.3.168
यश्चैनमधिरूढ: पुरुष: स चेन्द्रो यदपि ते भक्षितं तस्य ऋषभस्य पुरीषं तदमृतं तेन खल्वसि तस्मिन् नागभवने न व्यापन्नस्त्वम्॥ १६८॥
अनुवाद
और जो पुरुष उस पर सवार था, वह इन्द्र है। तूने जो बैल का गोबर खाया, वह अमृत था। इसीलिए तू नागलोक में जाकर भी नहीं मरा ॥168॥
‘And the man who was riding on it is Indra. The bull dung you ate was Amrit. That is why you did not die even after going to Nagaloka.॥ 168॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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