श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 166
 
 
श्लोक  1.3.166 
ये ते स्त्रियौ धाता विधाता च ये च ते कृष्णा: सितास्तन्तवस्ते रात्र्यहनी। यदपि तच्चक्रं द्वादशारं षड् वै कुमारा: परिवर्तयन्ति तेऽपि षड् ऋतव: द्वादशारा द्वादश मासा: संवत्सरश्चक्रम्॥ १६६॥
 
 
अनुवाद
'वे दो स्त्रियाँ धाता और विधाता हैं। काले और सफेद तंतु रात और दिन हैं। वे छह कुमार जो बारह आरों वाले चक्र को घुमा रहे थे, वे छह ऋतुएँ हैं। बारह महीने वे बारह आरे हैं। वर्ष वह चक्र है ॥166॥
 
‘The two women are Dhata and Vidhata. The black and white filaments are night and day. The six Kumaras who were rotating the wheel with twelve spokes are the six seasons. The twelve months are the twelve spokes. The year is that wheel.॥ 166॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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