Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.3.165: ‘तब उस पुरुष के कहने पर मैंने उस बैल का गोबर खाया था । तो फिर वह बैल और वह पुरुष कौन थे ? मैं आपसे सुनना चाहता हूँ कि वह सब क्या था ?’ उत्तंक के ऐसा पूछने पर उपाध्याय ने कहा - ॥165॥ | mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततस्तस्य वचनान्मया तदृषभस्य पुरीषमुपयुक्तं स चापि क:। तदेतद् भवतोपदिष्टमिच्छेयं श्रोतुं किं तदिति। स तेनैवमुक्त उपाध्याय: प्रत्युवाच॥ १६५॥
अनुवाद
‘तब उस पुरुष के कहने पर मैंने उस बैल का गोबर खाया था । तो फिर वह बैल और वह पुरुष कौन थे ? मैं आपसे सुनना चाहता हूँ कि वह सब क्या था ?’ उत्तंक के ऐसा पूछने पर उपाध्याय ने कहा - ॥165॥
'Then at the behest of that man I ate the dung of that bull. So who were that bull and that man? I want to hear from you, what all that was?' When Uttanka asked this, Upadhyaya replied -॥ 165॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥