ततस्तस्य वचनान्मया तदृषभस्य पुरीषमुपयुक्तं स चापि क:। तदेतद् भवतोपदिष्टमिच्छेयं श्रोतुं किं तदिति। स तेनैवमुक्त उपाध्याय: प्रत्युवाच॥ १६५॥
अनुवाद
‘तब उस पुरुष के कहने पर मैंने उस बैल का गोबर खाया था । तो फिर वह बैल और वह पुरुष कौन थे ? मैं आपसे सुनना चाहता हूँ कि वह सब क्या था ?’ उत्तंक के ऐसा पूछने पर उपाध्याय ने कहा - ॥165॥
'Then at the behest of that man I ate the dung of that bull. So who were that bull and that man? I want to hear from you, what all that was?' When Uttanka asked this, Upadhyaya replied -॥ 165॥