Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.3.162: वहाँ मैंने दो स्त्रियों को देखा जो करघे पर धागा डालकर कपड़ा बुन रही थीं। करघे पर काले और सफेद रंग के धागे थे। वह सब क्या था?॥162॥   |   mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना  »  श्लोक 162
 
 
श्लोक  1.3.162 
तत्र च मया दृष्टे स्त्रियौ तन्त्रेऽधिरोप्य पटं वयन्त्यौ तस्मिंश्च कृष्णा: सिताश्च तन्तव: किं तत्॥ १६२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ मैंने दो स्त्रियों को देखा जो करघे पर धागा डालकर कपड़ा बुन रही थीं। करघे पर काले और सफेद रंग के धागे थे। वह सब क्या था?॥162॥
 
‘There I saw two women who were weaving cloth by placing thread on the loom. The loom had black and white colored threads. What was all that?॥ 162॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)