Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.3.157: 'बहुत अच्छा' कहकर उत्तंक घोड़े पर सवार होकर तुरंत उपाध्याय के घर पहुँचे। वहाँ गुरुपत्नी स्नान करके बैठी थीं और केश-रचना कर रही थीं। यह सोचकर कि 'उत्तंक अभी तक नहीं आए हैं', उन्होंने शिष्य को शाप देने का निश्चय किया। 157. | mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तथेत्युक्त्वा तमश्वमधिरुह्य प्रत्याजगामोपाध्यायकुलमुपाध्यायानी च स्नाता केशानावापयन्त्युपविष्टोत्तङ्को नागच्छतीति शापायास्य मनो दधे॥ १५७॥
अनुवाद
'बहुत अच्छा' कहकर उत्तंक घोड़े पर सवार होकर तुरंत उपाध्याय के घर पहुँचे। वहाँ गुरुपत्नी स्नान करके बैठी थीं और केश-रचना कर रही थीं। यह सोचकर कि 'उत्तंक अभी तक नहीं आए हैं', उन्होंने शिष्य को शाप देने का निश्चय किया। 157.
Saying 'very good' Uttanka mounted the horse and immediately reached the Upadhyaya's house. Here the Guru's wife was sitting after taking a bath and combing her hair. Thinking that 'Uttanka has not yet come', she decided to curse the disciple. 157.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥