तत: स एनं पुरुष: प्राह प्रीतोऽस्मि तेऽहमनेन स्तोत्रेण किं ते प्रियं करवाणीति स तमुवाच॥ १५०॥
अनुवाद
तब उस पुरुष ने उत्तंक से कहा- ‘ब्रह्मन्! मैं आपकी इस प्रार्थना से अत्यन्त प्रसन्न हूँ। आप मुझे बताइए कि मुझे आपका कौन-सा प्रिय कार्य करना चाहिए?’ यह सुनकर उत्तंक ने कहा- ॥150॥
Then that man said to Uttanka- 'Brahman! I am very pleased with this prayer of yours. Tell me, which of your favourite tasks should I do?' Hearing this Uttanka said-॥ 150॥