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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना
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श्लोक 14
श्लोक
1.3.14
तस्य तं पुत्रमभिगम्य जनमेजय: पारीक्षित: पौरोहित्याय वव्रे॥ १४॥
अनुवाद
परीक्षित कुमार जन्मेजय महर्षि श्रुतश्रवा के पास गए और उनके पुत्र सोमश्रवा को पुरोहित पद के लिए चुना। 14॥
Parikshit Kumar Janmejay went to Maharishi Shrutashrava and selected his son Somashrava for the post of priest. 14॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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