Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.3.112: रानी की यह बात सुनकर उत्तंक ने क्षत्राणी से कहा—‘देवि! आप निश्चिंत रहें। सर्पराज तक्षक मुझसे युद्ध करने का साहस नहीं कर सकता।’ | mahabharat अध्याय 1.3: जनमेजयको सरमाका शाप, जनमेजयद्वारा सोमश्रवाका पुरोहितके पदपर वरण,आरुणि, उपमन्यु, वेद और उत्तंककी गुरुभक्ति तथा उत्तंकका सर्पयज्ञके लिये जनमेजयको प्रोत्साहन देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स एवमुक्तस्तां क्षत्रियां प्रत्युवाच भगवति सुनिर्वृता भव। न मां शक्तस्तक्षको नागराजो धर्षयितुमिति॥ ११२॥
अनुवाद
रानी की यह बात सुनकर उत्तंक ने क्षत्राणी से कहा—‘देवि! आप निश्चिंत रहें। सर्पराज तक्षक मुझसे युद्ध करने का साहस नहीं कर सकता।’
On hearing the queen say this, Uttanka said to the Kshatranī—‘Devi! You should remain worry free. King Takshak of snakes cannot dare to fight with me.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥