श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.29.9 
गरुड उवाच
माता मे कुशला शश्वत् तथा भ्राता तथा ह्यहम्।
न हि मे कुशलं तात भोजने बहुले सदा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
गरुड़ बोले- मेरी माता सदैव प्रसन्न रहती है। मैं और मेरा भाई दोनों सुखी हैं। परन्तु पिताजी! मुझे भोजन के अभाव में सदैव सुख की कमी रहती है।॥9॥
 
Garuda said- My mother is always happy. My brother and I are both happy. But father! I always lack happiness when it comes to getting enough food. ॥9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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