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श्लोक 1.29.9  |
गरुड उवाच
माता मे कुशला शश्वत् तथा भ्राता तथा ह्यहम्।
न हि मे कुशलं तात भोजने बहुले सदा॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| गरुड़ बोले- मेरी माता सदैव प्रसन्न रहती है। मैं और मेरा भाई दोनों सुखी हैं। परन्तु पिताजी! मुझे भोजन के अभाव में सदैव सुख की कमी रहती है।॥9॥ |
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| Garuda said- My mother is always happy. My brother and I are both happy. But father! I always lack happiness when it comes to getting enough food. ॥9॥ |
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