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mahabharat 1.29.8: कश्यपजी ने पूछा- बेटा! क्या तुम सब कुशल से हो? क्या तुम्हें विशेष रूप से दैनिक भोजन के संबंध में विशेष अधिकार प्राप्त हैं? क्या मनुष्य लोक में तुम्हारे लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध है? 8॥   |   mahabharat अध्याय 1.29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.29.8 
कश्यप उवाच
कच्चिद् व: कुशलं नित्यं भोजने बहुलं सुत।
कच्चिच्च मानुषे लोके तवान्नं विद्यते बहु॥ ८॥
 
 
अनुवाद
कश्यपजी ने पूछा- बेटा! क्या तुम सब कुशल से हो? क्या तुम्हें विशेष रूप से दैनिक भोजन के संबंध में विशेष अधिकार प्राप्त हैं? क्या मनुष्य लोक में तुम्हारे लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध है? 8॥
 
Kashyapji asked- Son! Are you all well? Do you have special privileges especially regarding daily meals? Is there enough food available for you in the human world? 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)