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mahabharat 1.29.7: तत्पश्चात् उन्होंने अपने पिता कश्यपजी को देखा। उनके पूछने पर, पुण्यात्मा गरुड़ ने उनके पिता को उनका कुशल-क्षेम बताया। महर्षि कश्यप ने उनसे इस प्रकार कहा।   |   mahabharat अध्याय 1.29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.29.7 
ततोऽपश्यत् स पितरं पृष्टश्चाख्यातवान् पितु:।
यथान्यायममेयात्मा तं चोवाच महानृषि:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने अपने पिता कश्यपजी को देखा। उनके पूछने पर, पुण्यात्मा गरुड़ ने उनके पिता को उनका कुशल-क्षेम बताया। महर्षि कश्यप ने उनसे इस प्रकार कहा।
 
Thereafter he saw his father Kashyapji. On his asking, the pure and virtuous Garuda informed his father about his well-being. Maharishi Kashyap spoke to him in this manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)