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mahabharat 1.29.6: ब्राह्मण और उसकी पत्नी के चले जाने के बाद पक्षीराज गरुड़ ने अपने पंख फैलाए और मन के समान तीव्र गति से आकाश में उड़ चले।   |   mahabharat अध्याय 1.29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.29.6 
सहभार्ये विनिष्क्रान्ते तस्मिन् विप्रे च पक्षिराट्।
वितत्य पक्षावाकाशमुत्पपात मनोजव:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण और उसकी पत्नी के चले जाने के बाद पक्षीराज गरुड़ ने अपने पंख फैलाए और मन के समान तीव्र गति से आकाश में उड़ चले।
 
After the Brahmin and his wife had left, the king of birds, Garuda, spread his wings and flew in the sky with a speed as fast as the mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)