Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.29.44: तब पर्वत के समान विशाल शरीर वाले, पक्षियों में श्रेष्ठ, सब पक्षियों में सबसे वेगवान गरुड़जी उस विशाल वृक्ष पर तुरंत बैठ गए, उसे हिलाते हुए और सहस्त्रों पक्षियों से उसकी सेवा करते हुए। बैठते ही उन्होंने अपनी असह्य गति से घने पत्तों से सुशोभित उस विशाल शाखा को तोड़ डाला। | mahabharat अध्याय 1.29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब पर्वत के समान विशाल शरीर वाले, पक्षियों में श्रेष्ठ, सब पक्षियों में सबसे वेगवान गरुड़जी उस विशाल वृक्ष पर तुरंत बैठ गए, उसे हिलाते हुए और सहस्त्रों पक्षियों से उसकी सेवा करते हुए। बैठते ही उन्होंने अपनी असह्य गति से घने पत्तों से सुशोभित उस विशाल शाखा को तोड़ डाला।
Then Garuda, having a body as huge as a mountain, the best of the birds, the swiftest of all the birds, immediately sat on that great tree, shaking it and serving it with thousands of birds. As soon as he sat down, with his unbearable speed he broke that huge branch decorated with dense leaves.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि सौपर्णे एकोनत्रिंशोऽध्याय:॥ २९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें गरुडचरित्र-विषयक उनतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥