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mahabharat 1.29.43: वटवृक्ष बोला, "पक्षिराज! यह मेरी सबसे बड़ी शाखा है, जो सौ योजन तक फैली हुई है। इस पर बैठो और इस हाथी और कछुए को खा जाओ।" 43   |   mahabharat अध्याय 1.29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.29.43 
रौहिण उवाच
यैषा मम महाशाखा शतयोजनमायता।
एतामास्थाय शाखां त्वं खादेमौ गजकच्छपौ॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
वटवृक्ष बोला, "पक्षिराज! यह मेरी सबसे बड़ी शाखा है, जो सौ योजन तक फैली हुई है। इस पर बैठो और इस हाथी और कछुए को खा जाओ।" 43
 
The Banyan tree said, "King of birds! This is my biggest branch which is spread over a hundred yojanas, sit on it and eat this elephant and the tortoise." 43
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)