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श्लोक 1.29.33  |
सौतिरुवाच
इत्युक्त्वा गरुडं सोऽथ माङ्गल्यमकरोत् तदा।
युध्यत: सह देवैस्ते युद्धे भवतु मङ्गलम्॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| उग्रश्रवाजी कहते हैं - शौनकजी! कश्यपजी ने गरुड़ से यह बात कही और उस समय उनकी कुशलक्षेम की प्रार्थना करते हुए कहा - 'गरुड़! युद्ध में देवताओं के साथ युद्ध करते हुए तुम्हारा कल्याण हो।' |
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| Ugrasravaji says - Shaunakji! Kashyapji said this to Garuda and at that time prayed for his well being and said - 'Garuda! May you be blessed while fighting with the gods in the war. |
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