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mahabharat 1.29.32: कछुआ विशाल बादल के समान है और हाथी विशाल पर्वत के समान भयानक है। उन दोनों को खाकर अमृत ले आओ ॥32॥   |   mahabharat अध्याय 1.29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.29.32 
महाभ्रघनसंकाशं तं भुक्त्वामृतमानय।
महागिरिसमप्रख्यं घोररूपं च हस्तिनम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
कछुआ विशाल बादल के समान है और हाथी विशाल पर्वत के समान भयानक है। उन दोनों को खाकर अमृत ले आओ ॥32॥
 
The tortoise is like a huge cloud and the elephant is as scary as a huge mountain. Eat them both and bring the nectar. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)