श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.29.31 
तावुभौ युद्धसम्मत्तौ परस्परवधैषिणौ।
उपयुज्याशु कर्मेदं साधयेप्सितमात्मन:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों एक दूसरे को मारने की इच्छा से मदमस्त रहते हैं। तुम शीघ्र जाकर उन्हें भोजन बना लो और अपना अभीष्ट कार्य सिद्ध करो ॥31॥
 
Both of them remain intoxicated with the desire to kill each other. You should go quickly and use them for food and accomplish your desired task. ॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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