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mahabharat 1.29.24: इस प्रकार सुप्रतीक और विभावसु ऋषि एक-दूसरे के शाप से हाथी और कच्छप के रूप में उत्पन्न हुए। उनके हृदय धन के लोभ से भर गए॥24॥   |   mahabharat अध्याय 1.29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.29.24 
एवमन्योन्यशापात् तौ सुप्रतीकविभावसू।
गजकच्छपतां प्राप्तावर्थार्थं मूढचेतसौ॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सुप्रतीक और विभावसु ऋषि एक-दूसरे के शाप से हाथी और कच्छप के रूप में उत्पन्न हुए। उनके हृदय धन के लोभ से भर गए॥24॥
 
In this way, the sages Suprateek and Vibhavasu were born as elephant and tortoise by each other's curse. Their hearts were filled with greed for wealth.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)