श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.29.23 
शप्तस्त्वेवं सुप्रतीको विभावसुमथाब्रवीत् ।
त्वमप्यन्तर्जलचर: कच्छप: सम्भविष्यसि॥ २३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार शाप देकर सुप्रतीक ने विभावसु से कहा, 'तुम भी जल में विचरण करने वाले कछुआ बनोगे।'
 
Thus cursed, Suprateek said to Vibhavasu, 'You too will become a tortoise roaming in the water.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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