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mahabharat 1.29.17: सुप्रतीक प्रतिदिन बँटवारे के लिए आग्रह करता था। तब एक दिन बड़े भाई विभावसु ने सुप्रतीक से कहा-॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.29.17 
विभागं कीर्तयत्येव सुप्रतीको हि नित्यश:।
अथाब्रवीच्च तं भ्राता सुप्रतीकं विभावसु:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
सुप्रतीक प्रतिदिन बँटवारे के लिए आग्रह करता था। तब एक दिन बड़े भाई विभावसु ने सुप्रतीक से कहा-॥17॥
 
Supratik used to insist for division everyday. Then one day the elder brother Vibhavasu said to Supratik-॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)