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mahabharat 1.29.15-16: प्राचीन काल में विभावसु नाम के एक महान ऋषि थे। वे स्वभाव से अत्यंत क्रोधी थे। उनके छोटे भाई का नाम सुप्रतीक था। वे भी महान तपस्वी थे। महामुनि सुप्रतीक अपने बड़े भाई के पास अपनी संपत्ति एक स्थान पर रखना नहीं चाहते थे।॥15-16॥   |   mahabharat अध्याय 1.29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  1.29.15-16 
आसीद् विभावसुर्नाम महर्षि: कोपनो भृशम्॥ १५॥
भ्राता तस्यानुजश्चासीत् सुप्रतीको महातपा:।
स नेच्छति धनं भ्राता सहैकस्थं महामुनि:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल में विभावसु नाम के एक महान ऋषि थे। वे स्वभाव से अत्यंत क्रोधी थे। उनके छोटे भाई का नाम सुप्रतीक था। वे भी महान तपस्वी थे। महामुनि सुप्रतीक अपने बड़े भाई के पास अपनी संपत्ति एक स्थान पर रखना नहीं चाहते थे।॥15-16॥
 
In ancient times there was a great sage named Vibhavasu. He was very short-tempered by nature. His younger brother's name was Suprateek. He was also a great ascetic. Mahamuni Suprateek did not want to keep his wealth in one place with his elder brother.॥15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)