श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.29.13 
कश्यप उवाच
इदं सरो महापुण्यं देवलोकेऽपि विश्रुतम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
कश्यप जी बोले- बेटा! यह बहुत पवित्र सरोवर है, जो स्वर्गलोक में भी प्रसिद्ध है।
 
Kashyap ji said- son! This is a very holy lake, which is famous even in the heavens.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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