श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  1.29.12-13h 
तस्माद् भक्ष्यं त्वमपरं भगवन् प्रदिशस्व मे।
यद् भुक्त्वामृतमाहर्तुं समर्थ: स्यामहं प्रभो॥ १२॥
क्षुत्पिपासाविघातार्थं भक्ष्यमाख्यातु मे भवान्।
 
 
अनुवाद
अतः हे प्रभु! कृपया मेरे लिए कोई दूसरा भोजन बताइए। प्रभु! वह भोजन ऐसा हो जिसे खाकर मैं अमृत लाने में समर्थ हो सकूँ। कृपया मुझे इतना भोजन बताइए कि मेरी भूख-प्यास मिट जाए। ॥12 1/2॥
 
Therefore, O Lord! Please tell me some other food for me. Prabhu! That food should be such that after eating it I can be capable of bringing Amrit. Please tell me enough food to satisfy my hunger and thirst. ॥ 12 1/2 ॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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