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mahabharat 1.29.11: भोजन के विषय में पूछने पर माता ने कहा, "निषादों को खाओ", परंतु हजारों निषादों को खाने पर भी मेरी तृप्ति नहीं हुई है॥11॥   |   mahabharat अध्याय 1.29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.29.11 
मात्रा चात्र समादिष्टो निषादान् भक्षयेति ह।
न च मे तृप्तिरभवद् भक्षयित्वा सहस्रश:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भोजन के विषय में पूछने पर माता ने कहा, "निषादों को खाओ", परंतु हजारों निषादों को खाने पर भी मेरी तृप्ति नहीं हुई है॥11॥
 
When asked about food, the mother said, "Eat Nishadas", but even after eating thousands of Nishadas I am not satiated. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)