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mahabharat 1.29.10: सर्पों ने मुझे उत्तम अमृत लाने के लिए भेजा है। आज मैं अवश्य ही वह अमृत लाकर अपनी माता को दासत्व से मुक्त करूँगा॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 29: कश्यपजीका गरुडको हाथी और कछुएके पूर्वजन्मकी कथा सुनाना, गरुडका उन दोनोंको पकड़कर एक दिव्य वटवृक्षकी शाखापर ले जाना और उस शाखाका टूटना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.29.10 
अहं हि सर्पै: प्रहित: सोममाहर्तुमुत्तमम्।
मातुर्दास्यविमोक्षार्थमाहरिष्ये तमद्य वै॥ १०॥
 
 
अनुवाद
सर्पों ने मुझे उत्तम अमृत लाने के लिए भेजा है। आज मैं अवश्य ही वह अमृत लाकर अपनी माता को दासत्व से मुक्त करूँगा॥10॥
 
The snakes have sent me to bring the best nectar. Today I will definitely bring that nectar to free my mother from slavery.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)