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mahabharat 1.28.5: इन प्रकार से ब्राह्मण सत्पुरुषों के लिए आदरणीय माना गया है। तात! क्रोध आने पर भी ब्राह्मण की हत्या से सर्वथा दूर रहना चाहिए। 5॥   |   mahabharat अध्याय 1.28: गरुडका अमृतके लिये जाना और अपनी माताकी आज्ञाके अनुसार निषादोंका भक्षण करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 28: गरुडका अमृतके लिये जाना और अपनी माताकी आज्ञाके अनुसार निषादोंका भक्षण करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.28.5 
एवमादिस्वरूपैस्तु सतां वै ब्राह्मणो मत:।
स ते तात न हन्तव्य: संक्रुद्धेनापि सर्वथा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इन प्रकार से ब्राह्मण सत्पुरुषों के लिए आदरणीय माना गया है। तात! क्रोध आने पर भी ब्राह्मण की हत्या से सर्वथा दूर रहना चाहिए। 5॥
 
In these ways, Brahmin is considered respectable for good men. Tat! Even if you get angry, you should completely stay away from killing a Brahmin. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)