Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.28.21: तत्पश्चात् शत्रुओं को पीड़ा देने वाले, अत्यन्त फुर्तीले, महान् बलवान और भूखे पक्षीराज गरुड़ ने मछली पकड़कर जीविका चलाने वाले बहुत से निषादों का नाश करने के लिए अपना मुख छोटा कर लिया॥21॥ | mahabharat अध्याय 1.28: गरुडका अमृतके लिये जाना और अपनी माताकी आज्ञाके अनुसार निषादोंका भक्षण करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् शत्रुओं को पीड़ा देने वाले, अत्यन्त फुर्तीले, महान् बलवान और भूखे पक्षीराज गरुड़ ने मछली पकड़कर जीविका चलाने वाले बहुत से निषादों का नाश करने के लिए अपना मुख छोटा कर लिया॥21॥
After that, Garuda, the king of birds who torments the enemies, is very agile, has great strength and is hungry, narrowed his mouth to destroy those many Nishadhas who earn their living by fishing. 21॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि सौपर्णे अष्टाविंशोऽध्याय:॥ २८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें गरुडचरित्रविषयक अट्ठाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥