श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 28: गरुडका अमृतके लिये जाना और अपनी माताकी आज्ञाके अनुसार निषादोंका भक्षण करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.28.2 
विनतोवाच
समुद्रकुक्षावेकान्ते निषादालयमुत्तमम्।
निषादानां सहस्राणि तान् भुक्त्वामृतमानय॥ २॥
 
 
अनुवाद
विनता बोलीं - समुद्र के बीच में एक द्वीप है, उसके एकांत प्रदेश में निषाद (प्राणियों को मारने वाले) निवास करते हैं। वहाँ हजारों निषाद रहते हैं। तुम उन्हें मारकर खा लो और अमृत ले आओ॥2॥
 
Vinata said - There is an island in the middle of the ocean, in its secluded region the Nishads (killers of living creatures) reside. Thousands of Nishads live there. Kill them, eat them and bring the Amrit.॥2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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