Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.28.19: इसके बाद पक्षीराज गरुड़ ने अपना मुख बहुत बड़ा करके निषादों का मार्ग रोककर खड़ा हो गया। तत्पश्चात् निषादगण शीघ्रतापूर्वक उस ओर दौड़े, जिधर सर्पभक्षी गरुड़ का मुख था।   |   mahabharat अध्याय 1.28: गरुडका अमृतके लिये जाना और अपनी माताकी आज्ञाके अनुसार निषादोंका भक्षण करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 28: गरुडका अमृतके लिये जाना और अपनी माताकी आज्ञाके अनुसार निषादोंका भक्षण करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.28.19 
तत: स चक्रे महदाननं तदा
निषादमार्गं प्रतिरुध्य पक्षिराट्।
ततो निषादास्त्वरिता: प्रवव्रजु:
यतो मुखं तस्य भुजङ्गभोजिन:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद पक्षीराज गरुड़ ने अपना मुख बहुत बड़ा करके निषादों का मार्ग रोककर खड़ा हो गया। तत्पश्चात् निषादगण शीघ्रतापूर्वक उस ओर दौड़े, जिधर सर्पभक्षी गरुड़ का मुख था।
 
After this, the king of birds made his mouth very large and stood blocking the path of the Nishadas. Thereafter, the Nishadas in a hurry ran in the direction where the face of the snake-eating Garuda was.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)