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mahabharat 1.28.14: विनता बोली - बेटा! वायु तुम्हारे दोनों पंखों की रक्षा करे और चन्द्रमा और सूर्य तुम्हारी पीठ की रक्षा करें॥ 14॥   |   mahabharat अध्याय 1.28: गरुडका अमृतके लिये जाना और अपनी माताकी आज्ञाके अनुसार निषादोंका भक्षण करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 28: गरुडका अमृतके लिये जाना और अपनी माताकी आज्ञाके अनुसार निषादोंका भक्षण करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.28.14 
विनतोवाच
पक्षौ ते मारुत: पातु चन्द्रसूर्यौ च पृष्ठत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
विनता बोली - बेटा! वायु तुम्हारे दोनों पंखों की रक्षा करे और चन्द्रमा और सूर्य तुम्हारी पीठ की रक्षा करें॥ 14॥
 
Vinata said - Son! May the wind protect both your wings, and may the moon and the sun protect your back.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)