Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.28.13-14h: पुत्र के स्नेह के कारण विनता ने पुनः यह कहा - यद्यपि वह अपने पुत्र के अतुलनीय बल को जानती थी, तथापि सर्पों द्वारा छले जाने के कारण वह अत्यन्त दुःखी थी। अतः वह प्रेमपूर्वक अपने पुत्र को आशीर्वाद देने लगी॥13॥ | mahabharat अध्याय 1.28: गरुडका अमृतके लिये जाना और अपनी माताकी आज्ञाके अनुसार निषादोंका भक्षण करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुत्र के स्नेह के कारण विनता ने पुनः यह कहा - यद्यपि वह अपने पुत्र के अतुलनीय बल को जानती थी, तथापि सर्पों द्वारा छले जाने के कारण वह अत्यन्त दुःखी थी। अतः वह प्रेमपूर्वक अपने पुत्र को आशीर्वाद देने लगी॥13॥
Due to her affection for her son, Vinata again said this - Though she knew about her son's matchless strength, she was still very sad because she had been cheated by the serpents. So she started blessing her son lovingly.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥