Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.28.10-11: विनता बोली, "बेटा! यदि कोई तुम्हारे कंठ पर पड़कर तुम्हें जलते हुए अंगारे के समान जला दे और बांसुरी का काँटा निगल जाने के समान पीड़ा दे, तो उसे समस्त वर्णों में श्रेष्ठ ब्राह्मण समझो। यदि तुम क्रोध से भरे हुए भी हो, तो भी तुम्हें ब्राह्मण का वध नहीं करना चाहिए।" | mahabharat अध्याय 1.28: गरुडका अमृतके लिये जाना और अपनी माताकी आज्ञाके अनुसार निषादोंका भक्षण करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विनतोवाच
यस्ते कण्ठमनुप्राप्तो निगीर्णं बडिशं यथा॥ १०॥
दहेदङ्गारवत् पुत्र तं विद्या ब्राह्मणर्षभम्।
विप्रस्त्वया न हन्तव्य: संक्रुद्धेनापि सर्वदा॥ ११॥
अनुवाद
विनता बोली, "बेटा! यदि कोई तुम्हारे कंठ पर पड़कर तुम्हें जलते हुए अंगारे के समान जला दे और बांसुरी का काँटा निगल जाने के समान पीड़ा दे, तो उसे समस्त वर्णों में श्रेष्ठ ब्राह्मण समझो। यदि तुम क्रोध से भरे हुए भी हो, तो भी तुम्हें ब्राह्मण का वध नहीं करना चाहिए।"
Vinata said, "Son! If someone burns you like a burning ember when he falls on your throat and gives you pain as if he has swallowed a thorn of a flute, then consider him to be the best Brahmin among all the castes. Even if you are filled with anger, you should not kill a brahmin. 10-11.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥