Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.27.9: वह वन सुन्दर, शुभ और पवित्र था तथा लोगों के मन को मोह लेने वाले समस्त शुभ गुणों से युक्त था। नाना प्रकार के पक्षियों के कलरव से युक्त और अत्यंत सुन्दर होने के कारण वह कद्रू के पुत्रों के हर्ष को बढ़ा रहा था॥9॥ | mahabharat अध्याय 1.27: रामणीयक द्वीपके मनोरम वनका वर्णन तथा गरुडका दास्यभावसे छूटनेके लिये सर्पोंसे उपाय पूछना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह वन सुन्दर, शुभ और पवित्र था तथा लोगों के मन को मोह लेने वाले समस्त शुभ गुणों से युक्त था। नाना प्रकार के पक्षियों के कलरव से युक्त और अत्यंत सुन्दर होने के कारण वह कद्रू के पुत्रों के हर्ष को बढ़ा रहा था॥9॥
That forest was beautiful, auspicious and sacred and was endowed with all the good qualities that attracted people's minds. Filled with the chirping of various birds and being extremely beautiful, it was increasing the joy of Kadru's sons.॥9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥