श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 27: रामणीयक द्वीपके मनोरम वनका वर्णन तथा गरुडका दास्यभावसे छूटनेके लिये सर्पोंसे उपाय पूछना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.27.4 
विचित्रफलपुष्पाभिर्वनराजिभिरावृतम् ।
भवनैरावृतं रम्यैस्तथा पद्माकरैरपि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उस दिव्य वन के चारों ओर विचित्र पुष्पों और फलों से भरी वन-श्रेणियाँ थीं। वह वन अनेक सुंदर भवनों और कमल-पुष्पों से आच्छादित था।
 
Forest ranges filled with strange flowers and fruits surrounded that divine forest. That forest was covered with many beautiful buildings and lotus-filled ponds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)