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mahabharat 1.27.3: गरुड़ के साथ सर्पगण उस द्वीप के सुन्दर वन में आये, जो चारों ओर से समुद्र से घिरा हुआ था और उसके जल से सिंचित हो रहा था। वहाँ पक्षियों के झुंड कलरव कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 1.27: रामणीयक द्वीपके मनोरम वनका वर्णन तथा गरुडका दास्यभावसे छूटनेके लिये सर्पोंसे उपाय पूछना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 27: रामणीयक द्वीपके मनोरम वनका वर्णन तथा गरुडका दास्यभावसे छूटनेके लिये सर्पोंसे उपाय पूछना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.27.3 
सुपर्णसहिता: सर्पा: काननं च मनोरमम्।
सागराम्बुपरिक्षिप्तं पक्षिसङ्घनिनादितम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
गरुड़ के साथ सर्पगण उस द्वीप के सुन्दर वन में आये, जो चारों ओर से समुद्र से घिरा हुआ था और उसके जल से सिंचित हो रहा था। वहाँ पक्षियों के झुंड कलरव कर रहे थे।
 
The serpents along with Garuda came to the beautiful forest of that island, which was surrounded by the ocean on all sides and was being anointed by its water. Flocks of birds were chirping there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)