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mahabharat 1.27.2: जब सर्पगण पहली बार विश्वकर्मा द्वारा निर्मित उस द्वीप पर आए, जहाँ अब मगरमच्छ रहते हैं, तो उन्होंने वहाँ भयंकर लवणासुर को देखा॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 1.27: रामणीयक द्वीपके मनोरम वनका वर्णन तथा गरुडका दास्यभावसे छूटनेके लिये सर्पोंसे उपाय पूछना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 27: रामणीयक द्वीपके मनोरम वनका वर्णन तथा गरुडका दास्यभावसे छूटनेके लिये सर्पोंसे उपाय पूछना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.27.2 
तं द्वीपं मकरावासं विहितं विश्वकर्मणा।
तत्र ते लवणं घोरं ददृशु: पूर्वमागता:॥ २॥
 
 
अनुवाद
जब सर्पगण पहली बार विश्वकर्मा द्वारा निर्मित उस द्वीप पर आए, जहाँ अब मगरमच्छ रहते हैं, तो उन्होंने वहाँ भयंकर लवणासुर को देखा॥ 2॥
 
When the snakes first came to the island built by Vishwakarma, where crocodiles now live, they saw the fearsome Lavanasur there.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)