उग्रश्रवाजी कहते हैं- गरुड़ की बात सुनकर सर्पों ने कहा- 'गरुड़! अपना पराक्रम दिखाकर हमारे लिए अमृत ले आओ। इससे तुम दासत्व के बंधन से मुक्त हो जाओगे।'॥16॥
Ugrashravaji says- After listening to Garuda, the snakes said- 'Garuda! Show your bravery and bring us nectar. This will free you from the bondage of slavery.'॥ 16॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि सौपर्णे सप्तविंशोऽध्याय:॥ २७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें गरुडचरित्रविषयक सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥