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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 27: रामणीयक द्वीपके मनोरम वनका वर्णन तथा गरुडका दास्यभावसे छूटनेके लिये सर्पोंसे उपाय पूछना
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श्लोक 13
श्लोक
1.27.13
विनतोवाच
दासीभूतास्मि दुर्योगात् सपत्न्या: पतगोत्तम।
पणं वितथमास्थाय सर्पैरुपधिना कृतम्॥ १३॥
अनुवाद
विनता बोली - हे पक्षीराज, दुर्भाग्यवश मैं एक सहधर्मिणी की दासी हूँ। इन सर्पों ने मेरे साथ छल करके मेरी जीती हुई बाजी पलट दी।
Vinata said - O King of birds, unfortunately I am the maid of a co-wife. These snakes cheated me and turned my winning game upside down.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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