श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 27: रामणीयक द्वीपके मनोरम वनका वर्णन तथा गरुडका दास्यभावसे छूटनेके लिये सर्पोंसे उपाय पूछना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.27.12 
स विचिन्त्याब्रवीत् पक्षी मातरं विनतां तदा।
किं कारणं मया मात: कर्तव्यं सर्पभाषितम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कुछ विचार करके गरुड़ ने अपनी माता विनता से पूछा - 'माते! मुझे सर्पों की आज्ञा का पालन क्यों करना पड़ता है?'॥12॥
 
After some thought, Garuda asked his mother Vinata - 'Mother! What is the reason that I have to obey the orders of snakes?'॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)