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mahabharat 1.27.11: 'खेचर! आकाश में उड़ते हुए तुम्हें अनेक सुन्दर स्थान दिखाई देते हैं; इसलिए हमें किसी अन्य सुन्दर, स्वच्छ जल वाले द्वीप पर ले चलो।'   |   mahabharat अध्याय 1.27: रामणीयक द्वीपके मनोरम वनका वर्णन तथा गरुडका दास्यभावसे छूटनेके लिये सर्पोंसे उपाय पूछना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 27: रामणीयक द्वीपके मनोरम वनका वर्णन तथा गरुडका दास्यभावसे छूटनेके लिये सर्पोंसे उपाय पूछना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.27.11 
वहास्मानपरं द्वीपं सुरम्यं विमलोदकम्।
त्वं हि देशान् बहून् रम्यान् व्रजन् पश्यसि खेचर॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'खेचर! आकाश में उड़ते हुए तुम्हें अनेक सुन्दर स्थान दिखाई देते हैं; इसलिए हमें किसी अन्य सुन्दर, स्वच्छ जल वाले द्वीप पर ले चलो।'
 
'Khechar! You see many beautiful places while flying in the sky; so take us to some other beautiful island with clear water.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)