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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 26: इन्द्रद्वारा की हुई वर्षासे सर्पोंकी प्रसन्नता  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.26.7 
आपूर्यत मही चापि सलिलेन समन्तत:।
रसातलमनुप्राप्तं शीतलं विमलं जलम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी पर चारों ओर जल भर गया। वह शीतल और निर्मल जल रसातल तक पहुँच गया। 7.
 
The earth was filled with water everywhere. That cool and clear water reached the abyss. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)