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mahabharat 1.25.9: अमरोत्तम! आप हमारे सबसे बड़े रक्षक हैं। पुरंदर! आपमें सर्वाधिक जल बरसाने की शक्ति है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.25: सूर्यके तापसे मूर् च् छत हुए सर्पोंकी रक्षाके लिये कद्रूद्वारा इन्द्रदेवकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 25: सूर्यके तापसे मूर् च् छत हुए सर्पोंकी रक्षाके लिये कद्रूद्वारा इन्द्रदेवकी स्तुति  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.25.9 
त्वमेव परमं त्राणमस्माकममरोत्तम।
ईशो ह्यसि पय: स्रष्टुं त्वमनल्पं पुरन्दर॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अमरोत्तम! आप हमारे सबसे बड़े रक्षक हैं। पुरंदर! आपमें सर्वाधिक जल बरसाने की शक्ति है॥9॥
 
‘Amarottam! You are our greatest protector. Purandar! You have the power to rain the maximum amount of water.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)