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mahabharat 1.25.7: अपने पुत्रों को इस अवस्था में देखकर कद्रू इन्द्र की स्तुति करने लगी - 'देवों के स्वामी! मैं आपको प्रणाम करती हूँ। बलसूदन! मैं आपको प्रणाम करती हूँ।'   |   mahabharat अध्याय 1.25: सूर्यके तापसे मूर् च् छत हुए सर्पोंकी रक्षाके लिये कद्रूद्वारा इन्द्रदेवकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 25: सूर्यके तापसे मूर् च् छत हुए सर्पोंकी रक्षाके लिये कद्रूद्वारा इन्द्रदेवकी स्तुति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.25.7 
तदवस्थान् सुतान् दृ ष् ट्वा कद्रू: शक्रमथास्तुवत्।
नमस्ते सर्वदेवेश नमस्ते बलसूदन॥ ७॥
 
 
अनुवाद
अपने पुत्रों को इस अवस्था में देखकर कद्रू इन्द्र की स्तुति करने लगी - 'देवों के स्वामी! मैं आपको प्रणाम करती हूँ। बलसूदन! मैं आपको प्रणाम करती हूँ।'
 
Seeing her sons in this condition, Kadru started praising Indra - 'Lord of all gods! I salute you. Balasudan! I salute you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)